सफ़र तेरे साथ का, साथ तेरे होने का,तेरा होना मेरे वजूद में गूंथा.... कहीं मुझसे जुड़ा तो कहीं खुद में छुपा....प्रतिबिम्ब सच्चाई का...सहजता तूफानों से लड़ते उस दीपक के प्रकाश सी.....अक्स है तू मेरे किस्सों का, ख्वाबों का..... अरनव प्रेम से भरा जिसमें मैं सरोबोर हो नाच उठती हूँ सूरज की पहली किरण सी ... मेरा उनके होने का कारवां ....उनमें सिमटने की आरज़ू... उन जज़्बातों को जानने समझने की कोशिश... जो रास्ते एक करते गए... तेरे मेरे मन के.. उस परिपक़्व स्वरुप की ओर !!